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पागलपन (Madness)

 Madness-Symptoms, Reasons, Causes

 

परिचय:-

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस रोग के कारण शरीर के सभी अंगों का संतुलन ठीक नहीं रहता तथा मस्तिष्क के स्नायु में किसी प्रकार का दोष उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण उसे पागलपन का रोग हो जाता है।

पागलपन रोग होने के कारण:-

इस रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण गलत तरीके का खान-पान है। शरीर में दूषित द्रव्य जमा हो जाने के कारण मस्तिष्क के स्नायु में विकृति उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण मस्तिष्क के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और पागलपन का रोग हो जाता है।

शरीर के खून में अधिक अम्लता हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता हैं क्योंकि अम्लता के कारण मस्तिष्क (नाड़ियों में सूजन) में सूजन आ जाती है जिसके कारण मस्तिष्क शरीर के किसी भाग पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और उसे पागलपन का रोग हो जाता है।

असंतुलित भोजन के कारण शरीर में विटामिन तथा लवणों की कमी कमी हो जाती है जिसके कारण मस्तिष्क की नाड़ियों में रोग उत्पन्न हो जाते हैं और व्यक्ति को पागलपन का रोग हो जाता है।

किसी प्रकार की चोट तथा अन्य संक्रमण के कारण भी स्नायु में सूजन आ सकती है जिसके कारण पागलपन का रोग उत्पन्न हो जाता है।

सिर पर किसी प्रकार से तेज चोट लगने के कारण भी मस्तिष्क की नाड़ियां अपना कार्य करना बंद कर देती  है जिसके कारण व्यक्ति को पागलपन का रोग हो जाता है।

अधिक चिंता, सोच-विचार करने, मानसिक कारण, गृह कलेश, लड़ाई-झगड़े तथा तनाव के कारण भी मस्तिष्क की नाड़ियों में रोग उत्पन्न हो जाता है और व्यक्ति को पागलपन का रोग हो जाता है।

अधिक मेहनत का कार्य करने, आराम न करने, थकावट, नींद पूरी न लेने, जननेन्द्रियों की थकावट, अनुचित ढ़ग से यौनक्रिया करना, आंखों पर अधिक जोर देना, शल्यक्रिया के द्वारा शरीर के किसी अंग को निकाल देने के कारण भी पागलपन का रोग हो सकता है।

यह रोग पेट में अधिक कब्ज बनने के कारण भी हो सकता है क्योंकि कब्ज के कारण आंतों में मल सड़ने लगता है जिसके कारण दिमाग में गर्मी चढ़ जाती है और पागलपन का रोग हो जाता है।

पागलपन रोग होने के लक्षण:-

इस रोग से पीड़ित रोगी कुछ न कुछ बड़बड़ाता रहता है तथा उसके शरीर का संतुलन ठीक नहीं रहता है।

रोगी व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है और उसे कुछ भी पता नहीं रहता है कि उसे क्या करना है या क्या नहीं करना है।

इस रोग से पीड़ित रोगी हर समय इधर-उधर घूमता रहता है।

इस रोग में रोगी व्यक्ति की सोचने की शक्ति कम हो जाती हैं तथा वह हमेशा अपने आप ही हंसता और बोलता रहता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी का शरीर पीला पड़ जाता है तथा उसके मुंह से लार निकलता रहती है।

पागलपन रोग से पीड़ित रोगी को जब क्रोध आता है तो वह किसी भी व्यक्ति से लड़ने-झगड़ने लगता है। रोगी व्यक्ति की आंखें हर समय चढ़ी-चढ़ी सी रहती हैं।

पागलपन का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

पागलपन का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 महीने तक फल, सब्जियां और अंकुरित अन्न खिलाने चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को फलों एवं सब्जियों के रस का सेवन कराके सप्ताह में एक बार उपवास कराना चाहिए। जिसके फलस्वरूप रोगी व्यक्ति के शरीर का दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाता है और रोगी के मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से कार्य करने लगती हैं और यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

पागलपन रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला का सेवन करना चाहिए। रोगी को सोयाबीन को दूध के साथ खाना चाहिए। इसके बाद कच्ची हरे पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति को अपने पेट को साफ करने के लिए एनिमा क्रिया करनी चाहिए तथा इसके बाद अपने पेट पर तथा माथे पर मिट्टी की पट्टी लगानी चाहिए। फिर कटिस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद मेहनस्नान, ठंडे पानी से रीढ़ स्नान और जलनेति क्रिया करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से अपना कार्य करने लगती है। इससे पागलपन का रोग कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।

पागलपन से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सूर्यतप्त जल दिन में कम से कम 6 बार पीना चाहिए और फिर भीगी पट्टी माथे पर लगानी चाहिए। जब पट्टी सूख जाए तो उसे हटा लेना चाहिए। फिर इसके बाद सिर पर आसमानी रंग का सूर्यतप्त तेल लगाना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को अच्छी नींद लेनी चाहिए।

इस रोग से पीड़ित रोगी को दिन में कई बार पानी में नींबू का रस मिलाकर पिलाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है और मस्तिष्क की नाड़ियां ठीक प्रकार से अपना कार्य करने लगती हैं।

एक टब में गुनगुना पानी भरना चाहिए। इसके बाद इस टब में रोगी व्यक्ति को लिटाना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए की रोगी व्यक्ति का मुंह पानी से बाहर रहें। इस क्रिया को प्रतिदिन कुछ समय के लिए करने से रोगी व्यक्ति का रोग ठीक होने लगता है।

पागलपन रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में ठंडे जल से भीगे तौलिए से अपने शरीर को पोंछना चाहिए तथा यही क्रिया रात के समय में भी करनी चाहिए। इस क्रिया को प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति के सिर पर दिन में 2-3 बार गीली मिट्टी की पट्टी या फिर कपड़े को भिगोकर उसकी पट्टी रखने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है। इस प्रकार से रोगी व्यक्ति का उपचार प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही महीनों में ठीक हो जाता है।

पागलपन से पीड़ित रोगी को आसमानी रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कम से कम 8 बार कुछ दिनों तक पिलाने तथा सिर पर नीली रोशनी डालने से लाभ होता है।

जानकारी

          इस प्रकार से पागलपन रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार प्रतिदिन करें तो यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

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