पोषण में विटामिन को कैसे संतुलित लिया जाये आईये जाने

पोषण में विटामिन

आज अगर विटामिन की खूबियों पर विश्वास करने वाले वैज्ञानिकों व लोग दुनिया में है तो इससे ज्यादा लोगों का विचार यह है कि अतिरिक्त मात्र में विटामिनों के सेवेन से कोई फायदा नहीं होता | कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भवस्था और बचपन को छोडकर हमें अपने पुरे जीवनकाल में जितनी मात्र में विटामिनों की आव्श्यकता होती है, सभी हमे अपने दैनिक आहार से कितने लोगों की विटामिनों की आवश्यकता पूरी हो जाती है | विशेषकर तीसरी दुनिया के देशों में |

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अब नए अनुसंधानों की बदोलत कुछ वैज्ञानिकों का कहना है की विटामिनों और खनिजों के बारे में चिकित्सा विज्ञान के परम्परागत विचार बहुत सीमित हैं और स्वास्थ्य को बनाए रखने में जैसे पहले सोचा जाता था, ये उससे खिन अधिक जटिल भूमिका अदा करते है | वास्तव में वैज्ञानिकों को अब तक १३ ऐसे विटामिनों के बारे में पता चलता है, जो उन रासायनिक क्रियाओं को नियंत्रिक करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते है जिनसे कोशिकाओं की रक्षा होती है और जो भोजन को उर्जा और सजीव उतकों में परिवर्तित करती है | कुछ विटामिन हमारे शरीर के अंदर भी पैदा होते है, जैसे विटामिन डी’ सूर्य की किरणों की सहायता से त्वचा में तैयार होता है और विटामिन के’ बायोटिन और पैन्थोतेनिक अम्ल मनुष्य की अंत में पे जाने वाले जीवाणुओं की मदद से बनते हैं |

कुछ दशकों से लोग यह मानते आए है की विटामिन सी’ से जुकाम ठीक होता है | लोगों का यह विश्वास भी भ्रामक है कि विटामिन बी-6 झुर्रियां दूर करता है| शायद इस नीम हकीमी के कारण ही कई वर्षों से विटामिनों पर शोधकार्य नहीं किया जा रहा है| लेकिन विश्वभर में किये गए सर्वेक्षणों ने आहार और स्वास्थ्य के बीच सामंजस्य के बारे में जानकारी उजागर करनी आरंभ कर दी थी | अस्सी के अंत तक विटामिनों की रोगों से रोकथाम की क्षमता के बारें में किये गए शोधों तक विटामिनों की रोगों से रोकथाम की क्षमता के बारे में किये गए शोधों को मान्यता भी मिलने लगी थी | इसी दौरान तेजी से वृधावस्था की और आबादी की कारण चिकित्सा की क्षेत्र में गंभीर रोगों के बजाय चिरकालिक रोगों जैसे ह्रदय रोग और कैंसर के उपचार पर कहीं अधिक शोधकार्य होने लगे थे | मनुष्य में चिरकालिक रोगों की आरंभिक अवस्था को अगर हम कम से कम दस वर्ष और आगे खिसका दें तो हम खरबों की रकम को बचा सकते हैं |

vitaminchart 1वैज्ञानिक इन दिनों कई पोषक तत्वों के प्रति काफी आशावान हैं, हालाँकि उनके बारे में जानकारी अभी पर्न्भिक अवस्था में ही है | एक तत्व है – फोलिक अम्ल’, इसको सर्वप्रथम पालक से प्राप्त किया गया था | पुरे यूरोप ३३ विभिन्न केंद्र में हुए शोधों से पता चलता है कि इन दोनों विकारों में से किसी रोग से ग्रस्त बच्चे को जन्म दे चुकी महिलाओं को अगली गर्भवस्था के दौरान फोलिक अम्ल देने से अगले शिशु में इन रोगों के होने की आशंकाएं काफी कम हो जाती है | एक अन्य शोध अध्ययन में फोलिक अम्ल को ग्रीवा कैंसर की रोकथाम में भी महत्त्वपूर्ण पाया गया है |

रक्त में थक्का जमाने में विटामिन के’ काफी सहायता करता है | हड्डियों में कैल्सियम मात्र के संतुलन को बनाए रखने में यह काफी सहायक है | रजोनिवृत्त महिलाए हड्डियों में तेजी से होने वाले क्षरण से मुख्य रूप से ग्रस्त होती है जिसके कारण उन्हें बीमारी आ घेरती है | शोध अध्ययनों के पता चला है कि प्रतिदिन विटामिन के’ के सेवन से इसे 30% तक कम किया जा सकता है |

लेकिन हाल के वर्षों में सर्वाधिक हलचल तो विटामिनों के उस समूह ने जिसे इ’ और ए’ कहते हैं| ये पोषक तत्व विषाक्त परमाण्विक खंडों को विसरित करते है, जिन्हें ओक्सिजन मुक्त मुल्क कहते है और कोशिकाओं के सामान्य उपापच के दौरान उत्पन्न होते है, कोशिकाओ के ये विषाक्त अनु सूर्य के प्रकाश, एक्सरे विकिरणों, ओजोन के धुंए और पर्यावरण के अन्य प्रदूषकों के कारण भी शरीर में पैदा होते है |

नई शोधो से पता चला है की विटामिन ए’ और सी का निय्मित्सेवं करने वालों में मोतियाबिंद का खतरा कम से कम 50% तक घट जाता है | कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार विटामिन इ’ स्वस्थ वृद्ध लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढाता है | पर्यावरण और ओषध विशेषगय डिनायल मेज्जिल कहते हैं की पोषक तत्व तंबाकू के धुंए वाहनों से निकलने वाले धुंए और अन्य प्रदूषकों से होने वाले नुकशान को दूर करने में भी लाभकारी हो सकते है |

पार्किसन रोग से पीड़ित लोगों के लिए विटामिन ई’ एवं विटामिन सी’ के मिश्रणों के सेवन से क्म्पक्म्पी उठने, कड़ापन आने और संतुलन खोने जैसे विकारों को टला जा सकेगा और इस कारण पार्किसन रोग की दवा लेवोदोपा से उपचार की आवश्यकता कम हो सकती है |

हमारे शरीर में सबसे अहम भूमिका निभाता है, एक योगिक बीटा केरोटिन | यह गाजर, शकरकंद आदि में बहुतायत से पाया जाता है |

बीटा केरोटिन को शरीर अपनी आवश्यकतानुसार विटामिन ऐ’ के सेवन से यकृत को हानि पहुंचती है और दुष्प्रभाव भी पद सकते है | लेकिन बीटा केरोटिन का शरीर में अधिक होना असंभव है | बोस्टन स्थित हार्डवर्ड मेडिकल स्कुल और ब्रिग्म एंड विमेंस अस्पताल के चिकत्सकों ने एक अध्ययन के फलस्वरूप बीटा केरोटिन के बारे में कई चमत्कारिक जानकारियां दी है | इस शोध अध्ययन से पता चला की जो लोग ह्रदय रोग से पीड़ित थे और जिनको 50 मिलीग्राम की मात्र में बीटा केरोटिन लगभग रोगना की गई थी उनकों दिल का दौरा, पक्षाघात और ह्रदय संबंधी अन्य रोगों के कारण मृत्यु की आशंका उन लोगों की तुलना में आधी हो गई जो प्लेसबो नामक दवा खा रहे थे |

मनुष्य में ऐसे पोषक तत्वों की कितनी मात्र में आवश्यकता होती है- उन्हें ग्रहण करने का सबसे उत्तम तरीका क्या है भोजन द्वारा या अनुपूरक माध्यम से? चिकित्सकों का कहना है कि हर व्यक्ति की विटामिन करने से पूरी तो हो सकती हैं लेकिन समस्या तो यह है की बात तो दूर उसके आसपास भी नहीं पहुंच पाते है| लेकिन उच्च मात्रा में अनुपूरक विटामिनों के सेवन के दीर्घकाल प्रभावों के बारे में अभी पूरी जानकारी भी नहीं है | एक ब्रिटिश बैज्ञानिक डॉक्टर वोल्टर विलेट सलाह देते है “फिलहाल मैं अधिक मात्र में विटामिनों के सेवन की सलाह नही देता हु, लेकिन में इस संभावना को नकारता भी नही हूं की आने वाले दो या तीन वर्षों में हमें इस बारे में अपनी राय बदलनी पद सकती है |

चिलित्स्कों के अनुसार इस समय सबसे बुधिम्तापूर्ण कदम होगा, अधिक मात्र में गाजर व पालक आदि का सेवन करना और स्वस्तय संबंधी नियमों का पालन करना | एन्तिओक्षिडेंट व अन्य पोषक तत्व कितने भी प्रभावशाली क्यों न हो ये अच्छी आदतों की जगह कभी नही ले सकते |

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