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“Khatti Bhaji (खाटी भाजी)” beneficial for skin disease in Ayurveda

खाटी भाजी यह एक साक के रूप में सेवन करने वाली जड़ी है । इसे जंगलों, खुले मैदानों, फसलों के वीच में से प्राप्त किया जा सकता है । इसके पत्ते बड़े-बड़े होते हैं । इन पत्तों के ऊपर बारीक से सफेद बाल नजर आएंगे । यही वः कैल्शियम है जिसके अंदर शक्तिशाली विटामिन होते हैं । खाटी भाजी का रस 50 ग्राम, मुली के पत्तों का रस 50 ग्राम...

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“Asafoetida (हींग)” Properties and Advantages in Ayurveda

हींग हींग अति गुणकारी है । इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है तथा दैनिक खान-पान में भी यह प्रयोग में लायी जाती है । हींग की पैदावार भारत में नहीं होती । यह अधिकतर अफगान, तजाकिस्तान उजबेकिस्तान तथा इनके साथ जुड़े कुछ क्षेरों में ही होती है । प्राचीन काल से ही भारतवासी अपने गर्म-मसालों के लिए वहीँ से हींग तथा अन्य वस्तुओं को मंगवाते रहे...

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“Cullen Corylifolium (बाकुची)” Profit and properties in Ayurveda

बाकुची यह पौधा प्राकृतिक रूप से जन्म लेने वाला यह अपने-आप में बहुत गुणकारी है इसके पत्ते मध्यम आकार के, नुकीले होते हैं । इसके फल गुच्छे के रूप में लगते हैं । उन गुच्छों में से काले रंग के दाने निकलते हैं जिनमें से दुर्गन्ध आती है । इसके फल गुच्छों के रूप में लगते हैं । उन गुच्छों में से काले रंग के दाने निकलते हैं जिनमें से...

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“Grass (दूब)” beneficial for Blood piles in Ayurveda

दूब दूब एक बेल है जो नदी-नालों आदि पानी वाले कितने ही तालाबों के किनारे-किनारे जन्म लेती है । यह भी एक प्राकृतिक जड़ी है । खुनी बवासीर के लिए दूब की बेल (घास) को लेकर मिट्टी के एक बर्तन में थोड़े से पानी के साथ डालकर हलकी आंच पर गर्म करें । जब यह उबलने लगे तो उसे किसी खुले बर्तन में डालकर उसकी भाप का बफारा लें ।...

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“Sensitive plant (Lajwanti), लाजवन्ती” beneficial in Ayurveda

लाजवन्ती लाजवन्ती का दूसरा नाम छुईमुई भी हो सकता है । इसका कारण है कि यह पौधा हाथ लगाने से मुरझा जाता है । जरा-सी चोट भी यह सहन नहीं करता । जिन लोगों की नाभि उतर जाती है उसके लिए लाजवन्ती के पत्तों का गुच्छा बनाकर उसकी कमर से बांध देने से नाभि ठिकाने पर आ जाती है । Sensitive plant (Lajwanti) Another name for sensitive plant can also...

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“Indian Barberry (दारू हल्दी)” properties and advantages in Ayurveda

दारू हल्दी यह जड़ी हमारे जीवन के भोजन से जुड़ी है, जो फसल के रूप में हमारे सामने आती है | इसकी खेती करके लोग बजारों में बेचते हैं । लाभ तथा गुण छोट और सुजन का उपचार दारू हल्दी, सज्जी, तिल, कारीजीरी, इन सबको कूट-पीसकर गर्म करके चोट तथा सुजन वाले स्थान पर लगा दें कुछ दिनों में ही सब-कुछ ठीक हो जाएगा । Indian Barberry This herb is...

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“Dry Ginger (सांतव सोंठ)” multiple uses in Ayurveda

सांतव सोंठ सोंठ वादी को मारने वाली एक जड़ी है । इसका सेवन करने के लिए – सोंठ 10 ग्राम गुड़ 40 ग्राम इन दोनों को मिलाकर खाने से हर प्रकार कर दर्द शरीर में से बहार निकल जाता है । 10 ग्राम सोंठ को पीसकर नमक में मिलाकर घी में तल लें । अब इसे थोड़ा-थोड़ा सुबह-शाम खाना शुरू करें तो आपका शरीर चुस्त रहेगा । सफेद मुसी इससे...

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“Fig (अंजीर)” Advantages and benefits in Ayurveda

अंजीर यह अपने-आप में ह एक फलदार वृक्ष है, जो बागों में अनेक फलदार वृक्षों के साथ ही लगा रहता है । इसे पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है । इन के पत्ते बड़े-बड़े और फल अखरोट के आकार के होते हैं, जो पकने पर नरम हो जाते हैं । लाभ तथा गुण अंजीर का पका हुआ फल खाने से सर्दी दूर हो जाती है । खून साफ होता...

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