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Medicinal use of Gonjia in Stomach Contracts and Fever

गौंजिया इसके पौधे प्राकृतिक रूप से जन्म लेते हैं । आम जंगलों, खुले मैदानों में इसे खूब देखा जा सकता है । लाभ तथा गुण गौंजिया का रस और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से हर प्रकार के बुखार दूर हो जाते हैं । पेचिश पेचिश रोगियों को गौंजिया को पीसकर पीना चाहिए । दिन में दो तीन बार ऐसा करने से पेट ठेक हो जाता है । Gunjia...

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Medicinal use of Pitvan in Weakness, Fever, Asthma, Diarrhea and Blood Clean

पिटवन यह बूटी अधिकतर बंगाल, असम, त्रिपुरा, सिकिक्म, भूटान में अपने-आप यानि प्राकृतिक रूप से पैदा होती है । इसके पत्ते गोल होते हैं । उनका रंग नीला तथा सफेद होता है । काम में इसकी केवल जड़ ही आती है । गुण तथा लाभ तासीर में गर्म, मधुर, सारक, कटुतिकत तथा शमन है । इससे त्रिदोष रोग का उपचार किया जाता है । मर्दाना कमजोरी में भी इसका सेवन...

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Medicinal use of Harfarevdi “हारफारेवडी” in Stomach Disease and Digestive Disease

हारफारेवडी हारफारेवड़ी का पौधा देखने में बड़ा सुंदर होता है । इसका जन्म प्रकृतिक रूप से मैदानी क्षेत्रों तथा पहाड़ी के आसपास के खुले क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से होता है । इसके पत्ते तीखे, लंबे कम चौड़े होते हैं, जिनका आकार कसौदी के पत्तों जैसा होता है । गुण तथा लाभ हारफारेवड़ी का फल तथा पत्ते सब के सब ही गुणकारी हैं । विशेष रूप से दिल के रोगियों...

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Medicinal use of Sahdai “सहदेई” in Fever, Eye Disease and Headache

सहदेई सहदेई एक बूटी है जो प्राकृतिक रूप से जन्म लेती है । इसके पत्ते पुदीने और तुलसी जैसे होते हैं । इस पर सफेद फुल आते है । यह अधिकार पहाड़ी तलहटियों में पाई जाती है । गुण तथा लाभ सहदेई की लुगदी में पारा पाया जाता है । पुराने बुखार के लिए सहदेई के पत्ते काली मिर्च के साथ पीसकर खाएं तो बुखार से मुक्ति मिलेगी । सिरदर्द...

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Medicinal use of Sarfinka in Fever and Bad Breath

सरफींका यह बूटी प्राकृतिक रूप से ही पहाड़ी क्षेत्रों में जन्म लेती है । इस पर लाल रंग के छोटे-छोटे फुल आते हैं, जो बाद में फलियों का रूप धारण कर लेते हैं । उनमें से सफेद रंग के फल निकलते हैं । लाभ सरफोंक की जड़ को हुक्के की चिलम में भर कर पीनसे से सांस का रोग नष्ट हो जाता है, इसके पौधे की पहचान के लिए चित्र देखें...

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Medicinal use of Rasna in Fever, Stomach Disease and Cough

रास्ना रास्ना एक बेल की भांति बंगाल में प्राचीन वृक्षों पर उत्पन्न होकर फलती-फूलती है, (देखें चित्र, रास्ना की बेल एक पुराने वृक्ष से लिपटी हुई है) | रास्ना के फुल पीले रंग के होते हैं | फलियों के अंदर मोठ की भांति छोटे-छोटे दाने होते हैं | इसकी तासीर गर्म होती है | इसके सेवन से पाचन शक्ति बढ़ती है | खांसी के रोग को दूर करता है |...

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“Maize (मक्का)” beneficial uses in Ayurveda

मक्का गेहूं, बाजरा, ज्वार, जो हमारे भोजन के विशेष साधन माने जाते हैं । मक्का हमारे देश में फसल के रूप में मौसम के अनुसार बोया जाता है । इस पर तीन-चार मास के पशचात फल लगता है, जिसे आम लोग भुट्टा कहते हैं । मक्का की रोटी भी बनती है । इसके भुट्टे भुनकर लोग खूब खाते हैं । मक्का के सेवन से मानव शरीर को एक नई शक्ति...

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“Peanut (मूंगफली)” Properties and Advantages in Ayurveda

मूंगफली भारत के रेतीले तथा गर्म क्षेत्रों में मूंगफली काफी पैदा होती है । गरीब जनता तो इसे गरीबों के बादाम के नाम से पुकारती है । सर्दियों के दिनों में तो अक्सर लोग इसे खाते नजर आते हैं । मूंगफली की फलियां जमीन के अंदर रहती हैं । ऊपर तो केवल इसके पत्ते रहते हैं । मुंगफली का तेल निकालकर खाने के काम में लिया जाता है । मूंगफली...

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