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“Aloe Vera (ग्वारपाठा)” useful for Eye disease, Ear pain in Ayurveda

ग्वारपाठा इसका पौधा अधिकतर खुले मैदानी क्षेत्रों तथा जंगलों में प्राकृतिक रूप से जन्म लेता है । इसके लंबे-लंबे पत्ते होते हैं । रोग तथा उपचार नेत्र रोगों में उपयोगी ग्वारपाठा का अर्क निकालकर अथवा बाजार में किसी वैद्द की दुकान से लाकर रात को सोते समय आंख में डालते रहने से आंखों के हर प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं । पित्त विकार तथा खांसी ऐसे सब रोगियों...

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Multiple uses of “Azadirachta Indica Tinospora नीम गिलोय (गुर्च) ” in Ayurveda

नीम गिलोय (गुर्च) पाठक जन इस विचित्र नाम को सुनकर चौंक उठे होने कि नीम और गिलोय एकसाथ दो नाम इकट्ठे ही कैसे जुड़ गए? वास्तव में यह नाम दो नामों के जुड़ने से ही बनता है | इसका कारण है कि नीम अपने आप में एक बहुत बड़ा वृक्ष है | गिलोय उस पर चढ़ी हुई बेल होती है जो इस वृक्ष के सहारे पलती है | गिलोय को...

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“Talis Patra (तालीस पत्र)” medicinal uses in Ayurveda

तालीस पत्र तालीस का वृक्ष बहुत बड़ा होता है जो अधिकतर जंगलों में ही मिलता है । इसकी लकड़ी फर्नीचर बनाने के काम आती है । इसकी तासीर थोड़ी गर्म है । यह प्राकृतिक रूप से जन्म लेने वाला वृक्ष दूर से ही अपने लंबे पत्तों के कारण पहचाना जाता है । गुण तथा लाभ तालीस पत्र लघु-तीक्ष्ण-गरम है । इससे खांसी, वात, अरुचि, गल्म, मंदाग्नि और क्षय रोग का...

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“Milk Bush (सातला)” uses and advantages in Ayurveda

सातला सातला कोई वृक्ष नहीं बल्कि एक बेल होती है जिसके पत्ते खैर के पत्तों की भांति होते हैं, जिन पर पीले रंग के फुल खिलते हैं । इनसे ही एक  पतला तथा चपटा फल लगता है । उस फल के अंदर काले रंग के बीज निकलते हैं ।  गुण तथा लाभ यह सातला पकने पर जता सख्त हो जाता है । सातला पेट के रोगियों के लिए बहुत अच्छा...

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“Luffa Echinata (देवदाली)” medicinal uses in Ayurveda

देवदाली (ववर बेल) यह एक बेल के आकार में बड़े-बड़े वृक्षों पर चढ़ी नजर आती है । किसान लोग इससे खेत की बाढ़ का काम भी लेते हैं । गुण तथा लाभ इसके फल पर छोटे-छोटे कांटे होते हैं । इसका फल छोटी तोरी की भांति होता है । इसके प्रयोग से खांसी, श्वास, अर्श, क्षय, कामला, बुखार जैसे अनेक रोगी ठीक हो जाते हैं । Luffa Echinata It is...

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“Indian beech (करंज)” beneficial in Digestive diseases, Worm disease, Cough

करंज करंज के पेड़ बहुत बड़े होते हैं, जो घने जंगल में मिलती हैं । फुल हलके आसमानी रंग के, फल भी उसी रंग में नजर आते हैं । यह प्रकृतिक रूप से पैदा होने वाला वृक्ष है । गुण तथा लाभ पेट रोगों के लिए लाभदायक, नेत्र रोगों को दूर करने वाला, स्वाद में कड़वा, अर्श, प्रमेह, प्लीहा अदि रोगों को दूर करता है । खांसी व् कृमि रोगों...

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Medicinal uses of “Bamboo (बांस)” in Ayurveda

बांस बांस के बारे में यह तो प्रसिद्ध ही है कि बांस की आग पल भर में ही पुरे जंगल में फैल जाती है । बांस के पौधे लंबे कद के उंचे और लात की भांति तने खड़े रहते हैं । भारत में लट्ठ बाजी का अपना ही एक स्थान है और यह लट्ठ हमें बांस द्वारा ही प्राप्त होते हैं । इसी बांस से वंशलोचन निकलता है । कभी-कभार...

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“Cassia (अमलतास)” useful in throat disease and cough

अमलतास अमलतास का वृक्ष बहुत बड़ा होता है । इसके पत्ते लाल चंदन के पतों की भांति होते है । इस पर पीले रंग के फुल खिलते हैं । जिनसे एक डेढ़ फुट तक गोल फल तैयार होते है । उन फलों के अंदर से काले रंग का गुदा निकलता है । अमलतास पूर्ण रूप से मानव जाति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है । वृक्ष से लेकर फल तक...

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