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Medicinal use of Nose Chikni-Sneeze Wort in Epilepsy

नाक छिकनी इसे जड़ों की एक क्षुप के रूप में देखा जा सकता है । इसके पत्ते छोटे होते हैं । इसके नीचे कंद होता है । गुण तथा लाभ जैसा नाम वैसा ही काम यानी जिस आदमी को छींक आनी शुरू हो जाती है । इसका सेवन मिरगी के मरीज को होश में लाने के लिए व् नशा उतरने के लिए किया जाता है । नाकछिकनी की तासीर गर्म...

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Medicinal use of VishKhpra in Bloody piles, Eye diseases

विषखपरा विषखपरा का पौधा बहुत छोटे कद का होता है । यह अक्सर जमीन पर फैलने पर क्षुप हैं । इस पर गुलाबी रंग के फुल खिलते हैं । इसकी जड़ सफेद रंग की तथा मोटी होती है । यह तीन रंगों में जन्म लेती है । 1. काला, 2.सफेद, लाल इनमें से लाल रंग का विषखपरा अधिक पैदा होता है । यह बात ध्यान रहे कि इसमें से लाल...

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Medicinal use of Srivas Gandhaviroja in Gonorrhea disease

श्रीवास (गंधाविरोजा) मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी जड़ी प्राकृतिक रूप से ही जन्म लेती है । भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में यह अधिक मात्रा में मिलती है । गुण तथा लाभ स्वाद कड़वा, तासीर गर्म वाट, पित्त, खांसी जैसे रोग को दूर करने में पूरी शक्ति रखती है । हर प्रकार के नेत्र रोग तथा खारिश-खुजली को दूर करने में समर्थ है । सुजाक रोग सुजाक रोग अति कष्टदायक...

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Medicinal use of Gonjia in Stomach Contracts and Fever

गौंजिया इसके पौधे प्राकृतिक रूप से जन्म लेते हैं । आम जंगलों, खुले मैदानों में इसे खूब देखा जा सकता है । लाभ तथा गुण गौंजिया का रस और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से हर प्रकार के बुखार दूर हो जाते हैं । पेचिश पेचिश रोगियों को गौंजिया को पीसकर पीना चाहिए । दिन में दो तीन बार ऐसा करने से पेट ठेक हो जाता है । Gunjia...

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Medicinal use of Gajpit in Constipation, Sore Throat, Worm Disease

गजपीठ यह छोटा-सा पौधा जड़ी-बूटी ज्ञान में अपनी अलग से एक पहचान रखता है जैसे कि आप चित्र में इस पौधे की चित्र देख रहें हैं । इसके पत्ते बहुत चौड़े और उनके अंदर से फलदार डंडी निकलती है । इसकी तासीर गर्म, रुक्ष, तीक्ष्ण तथा कब्ज को दूर करने वाली है । अतिसार, श्वास, कंठ और कृमि रोगों से मानव को बचाया जा सकता है । Gajpit This little...

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Medicinal use of Shotakchini in Heart Diseases, Eye Diseases

शोतकचीनी इसका पौधा मध्यम कद का होता है तथा पत्ते लंबे, जिनकी जड़ों से सफेद रंग के छोटे-छोटे फुल खिलते हैं । यह आमतौर पर खुले मैदानों में मिलता है । गुण तथा लाभ शेतक चीनी पेट के रोगियों के उपचार में सहयोग देने वाली जड़ी है । हृदय-रोगियों को भी इसके सेवन से काफी लाभ पहुंचता है । नेत्र रोगों के लिए तो बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुई है...

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Medicinal use of Pitvan in Weakness, Fever, Asthma, Diarrhea and Blood Clean

पिटवन यह बूटी अधिकतर बंगाल, असम, त्रिपुरा, सिकिक्म, भूटान में अपने-आप यानि प्राकृतिक रूप से पैदा होती है । इसके पत्ते गोल होते हैं । उनका रंग नीला तथा सफेद होता है । काम में इसकी केवल जड़ ही आती है । गुण तथा लाभ तासीर में गर्म, मधुर, सारक, कटुतिकत तथा शमन है । इससे त्रिदोष रोग का उपचार किया जाता है । मर्दाना कमजोरी में भी इसका सेवन...

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Medicinal use of Nisit in Constipation, Worm, Phlem, Spleen, Stomach, Pile and Heart Disease

निसीत निसीत हमें कई रंगों में उपलब्ध होती है । 1. सफ़ेद 2. श्याम 3. लाल 4. काली सफेद निसीत की बेल जंगलों में होती है । इस पर सफेद रंग के फुल आते हैं, उनमें चार-चार बीज होते हैं । इसके पत्ते नुकीले तथा गोल होते हैं । इस बील की लकड़ी में तीन धारे होती हैं । सफेद निसीत को सबसे अच्छा गुणकारी माना जाता है । काली...

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Medicinal use of Juhi plant in Bile Diseases and Heat Stroke

जूही संस्कृत नाम – थूकि जूही एक प्रसिद्ध जड़ी है । बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि जूही का कोई पौधा नहीं होता बल्कि यह एक लता होती है जो बड़े पौधों पर चढ़ कर पलती है । प्रकृति का यह खेल भी कितना विचित्र लगता है कि बिना जड़ के हरे पौधे पल रहे हैं । जूही को इन चार जातियों में बांटा गया है 1....

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Medicinal use of Kasoda Plant in Weakness, Constipation, Body Head, Itching.

क्सौदा इसका पौधा धरती से दो-तीन फुट ऊंचा होता है, इसकी पत्तियां जामुन की पत्तियों जैसी ही, उसी आकार की होती हैं । इसकी कोई फसल नहीं बोई जाती । यह प्राकृतिक रूप से धरती से जन्म लेता है । इस पर पीले रंग के फुल आते हैं और चपटी फलियां फल के रूप में लगती हैं । फलियों के अंदर पपटे रंग के बीज होते हैं । कुछ लोग...

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Medicinal use of Velvet Plant in Cough, Cold, Colic and Diarrhea

पाढ़ पाढ़ कोई वृक्ष या पौधा नहीं बल्कि एक बेल होती है | इसके कोने में से सफेद और सूक्ष्म मोर के समान फुल निकलता है | इसके पत्ते गोल होते हैं तथा फल मक्का के दानों की भांति लाल होते हैं | गुण तथा लाभ पाढ़ उष्ण, चरपरा, कडुवा, पोक्षण तथा हल्का होता है | इसके द्वारा हम खांसी, नजला, जुकाम, शूल, ज्वर, अतिसार जैसे रोगों का उपचार कर...

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Medicinal use of Harfarevdi “हारफारेवडी” in Stomach Disease and Digestive Disease

हारफारेवडी हारफारेवड़ी का पौधा देखने में बड़ा सुंदर होता है । इसका जन्म प्रकृतिक रूप से मैदानी क्षेत्रों तथा पहाड़ी के आसपास के खुले क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से होता है । इसके पत्ते तीखे, लंबे कम चौड़े होते हैं, जिनका आकार कसौदी के पत्तों जैसा होता है । गुण तथा लाभ हारफारेवड़ी का फल तथा पत्ते सब के सब ही गुणकारी हैं । विशेष रूप से दिल के रोगियों...

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