Herbal Treatment And Health

हृदय रोगी महिलाय अवश्य अपनाएं योग

Category: Herbal Treatment And Health Written by Jaswinder Singh / December 23, 2016

हृदय रोगी महिलाय : योग अपनाएं

heartएक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 25 से 60 साल तक आयु वर्ग में प्रति एक हजार लोगों में से 33 व्यक्ति हृदयरोग से पीड़ित हैं जो कि दिल के दौरे का कारन बन जाता है | हृदयरोगियों में 30 फीसदी महिला रोगी होती हैं | हृदय रोग चिकत्सा विशेषज्ञों का मानना है कि तनावपूर्ण जीवन से भारतीय महिलाओं में भी ह्रदय रोग चिंताजनक गति के साथ बढ़ रहा है | स्थिति यह हो गई है कि प्रत्येक छ: पुरुष के अनुपात में चार महिलाएं हृदय रोग से गंभीर रूप से पीड़ित हो चुकी हैं |

डेढ़-दो दशक पहले तक महिलाओं पर हृदय रोग का प्रभाव प्राय: नगण्य था या पचास साल की उम्र से ऊपर की महिलाए ही शिकार होती थीं, जिसका प्रमुख कारन था कि पहले महिलाएँ सीधी-सादी जिंदगी बिताती थीं, परन्तु आज की महिलाएं पुरुषों की तरह ही तनावपूर्ण वातावरण से गुजर रही हैं | युग-परिवर्तन के कारण उनके रहन-सहन का तौर-तरीका भी बदलता जा रहा है | परुषों की भांति आज की महिलाएं भी बेरोजगारी, महत्वकांक्षा, धुम्रपान और मधपान की शिकार हैं | सम्पन्न परिवार की भारतीय महिलाओं में अधिकाँश महिलाएं तनावपूर्ण जिंदगी जीती हैं, जबकि उन्हें हर प्रकार की सुख-सामग्री उपलब्ध रहती है | तनाव का सबसे बड़ा कारण अकेलापन, दाम्पत्य-सुख का अभाव और नशीली चीजों का सेवन है | ऐसे परिवारों की अधिकाँश महिलाएं खाने-पीने का कोई परहेज नहीं रखती हैं तथा शराब और सिगरेट का भी सेवन करने लगती हैं | इन सारी समस्याओं से गुजरने वाली महिलाओं में हृदय रोग के होने की संभावना ज्यादा रहती है |

हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं के लिए जहाँ यह जरूरी है कि वे अपने रहन-सहन, खान-पान के तौर-तरीकों में बदलावलाएं वहीँ यह भी जरूरी है कि वे अपनी मानसिक स्थिति में भी सुधर लाएं | ऐसी महिलाओं को चाहिए कि वे हृदय रोग के आघात से बचने के लिए ध्यान योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं | आधुनिक भौतिक विज्ञान द्वारा पुष्ट भावातीत ध्यान और सिद्धि कार्यक्रम अब हृदय रोग पीड़ित महिलाओं के लिए भी वरदान सिद्ध हुआ है | इस संबंद में अनेक वैज्ञानिक परीक्षण हुए हैं जिससे यह साबित हुआ है कि जो पुरुष और महिलाएं नियमित रूप से भावातीत ध्यान सिद्धि कार्यक्रम का अभ्यास करते रहें हैं, उनकों संवेदात्मक स्थिरता में वृद्धि हुई, चिंता रोग में कमी आई, कुठित भावना कम हुई, आताम्विश्वास और आत्म-नियंत्रण में वृद्धि हुई |

अमरीका के न्यूयार्क नगर में डा. राबर्ट कोथ बालेस ने भावातीत ध्यान के पंद्रह अच्छे अनुभवी साधकों को लेकर प्रयोग किया | तुलना कि लिए कुछ ऐसे लोगों को लिया जो ध्यान नहीं करते थे, केवल आँख बंद कर विश्राम करते थे | दोनों ही समूहों का इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम किया | ध्यानियों में भावातीत ध्यान का अभ्यास करते समय पाँच धड़कन प्रति मिनट की कमी पाई गई | हृदय की धडकनों में प्रति मिनट यह कमी इस बात की पुष्ट करती है कि ध्यान के समय हृदय पर भार घट जाता है और साधक को विश्रांति का अनुभव होता है |

भावातीत ध्यान आरम्भ करने के पश्चात् परीक्षण द्वारा हम देखने में आया कि उनकी चिंताओं के स्तर में विलक्षण रूप से कमी आई और भावातीत ध्यान न करने वालों की तुलना में उनहोंने बहुत कम चिंता दर्शाई | ज्यों-ज्यों भावातीत ध्यान की अवधि बढाई जाती है, त्यों-त्यों चिंता क्रमश: कम होती जाती है |

भावातीत ध्यान की योजना समग्र रूप से चिंताओं में कमी उत्पन्न करती है | चिंता दैहिक प्रत्यक्षीकरण गत्यात्मक क्रियाओं, वैद्धिक एवं सवेंज्ञात्म्क क्रिया-कलापों के प्राय: सभी क्षेत्रों के  क्रियाविन्ति की विकृतियों से जुडी हुई है |

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