Home » Herbal Treatment And Health » अलसर से आंतो की बीमारी के कारण तथा उपचार

आँतों का दुश्मन: अल्सर

जिस प्रकार मुहं में अथवा जीभ पर चाले हो जाते हैं , उसी प्रकार आमाशय की भीतरी परत पर अथवा छोटी अंत के उपरी हिस्से से जुड़े दुओदिन्म पर यदि चाले हो जाते हैं , तो उन्हें अल्सर कहते हैं | अल्सर, चालों के आकर से भी बड़े होते हैं एवं गहरे भी ज्यादा होते हैं | नासूर की तरह यदि अल्सर आमस्य में हों तो उन्हें गैस्ट्रिक अल्सर कहते हैं एवं दुओडीनम का अल्सर दुओडीनम कहलाता है | नवीनतम खोज के अनुसार अल्सर हेलिको बैक्टर पैलोरी नामक कीटाणु से होता है|

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रोग के प्रारंभ में रोगी अक्सर कोई दुर्द महसूस नहीं करता बल्कि खाना खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस करता है | जैसे की पेट में हवा भर गई हो | फिर धीरे धीरे जलन भरा दर्द महसूस होता है | बच्चों में बार बार उल्टी होना, अल्सर का एक मुख्य कारण है |

एंटएसिड गोलियां या मिक्सचर ले लेने पर या दूध पी लेने पर अल्सर से दुर्द में अक्सर राहत मिलती है | उल्टी हो जाने पर भी दर्द में आराम मिल जाता है |

पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा का रोग लगभग 25% अधिक होता है | जिन लोगों के खून का ग्रुप ओ होता है , उनमे अल्सर का रोग अपेक्षाकृत ज्यादा होता है | ऐसी मान्यता है कि आनुवंशिकता का इस रोग के साथ घर संबंध है | मां बाप में से किसी को भी अल्सर है तो संतानों में अल्सर होने की संभावना सामान्य से दुगुनी रहती है |

कारण:-

ग्रहण किए हुए भोजन को पचाने की क्रिया मुंह में ही प्रारंभ हो जाती है | भोजन को चाबते समय लार ग्रन्थियों का रस भोजन में मिलते ही एक लंबी रासायनिक क्रियाओं को श्रंखना का सूत्रपात हो जाता है| भोजन आमाशय में पहुंचने के साथ ही आमाशय में स्थित ग्रन्थियों से एसिड पेप्सिन नामक रसायन उसमे मिल जाते हैं | आमाशय की भीतरी परत इस प्रकार की बनी होती है कि साधारणता उस पर अम्ल होने का एक कारण यह भी है की भोजन अथवा पेय पदार्थों के साथ घुल मिल जाने से अम्ल की तीव्रता में कमी आ जाती है और उसकी जलाने की शक्ति कमजोर पड़ जाती है | आमाशय खाली होने के कारण अम्ल का त्नुक्र्ण नहीं हो पाता एवं तेज अम्ल द्वारा आमाशय अथवा द्युओदिन्म की आंतरिक सतह को नुक्सान पहुँचाने की आशंका बन जाती है | यदि इन्हीं कारणों से आमस्य की भीतरी सतह में सुजन आई हुई हो तो अम्ल से सूजी हुई परत में घाव होकर अल्सर बन जाएगी |

गेस्त्रैतिस अल्सर कीताणुओं के संक्रमण से होती है | अतः सदा गला अथवा अशुद्ध भोजन से परहेज करना चाहिए | शराब, धुम्रपान तेज व तीखें मसालें, जर्दा, चाय एवं काफी, आमाशय एवं दुओदिन्म की आंतरिक सतह के लिए प्रदाहक होती है जिससे सुजन होकर गस्त्रिक होने एवं अंततः अल्सर हिने की आशंका बढ़ जाती है | एस्प्रीन कभी खाली पेट नहीं ली जानी चाहिए क्योंकि यह भी नुकसानदायक है|

इलाज:-

दर्द निवारक दवाएं:-

इनसे रोग का इलाज नहीं होता | इनका प्रयोजन दर्द से राहत प्रदान करना होता है |

सुजन कम करने वाली दवाएं:-

जब तक सुजन रहेगी, तब तक अल्सर के ठीक होने की प्रक्रिया प्रारम्भ महीन हो सकती | इसलिए सूजन निरोधक दवाएं किया जाना आवश्यक है |

प्र्त्यक्ल दवाएं:-

ये दवाएं रासायनिक क्रिया द्वारा एसिड की अम्लीय प्रकृति में परिवर्तन करके क्षार्तीयता को बढ़ा देती है जिससे अल्सर को ठीक होने का अवसर मिल सके |

रेनीटीडीन वर्ग की दवाएं:-

जो आमाशय की ग्रन्थियों से अम्ल स्त्राव को ही घटा देती है और इस प्रकार अल्सर को ठीक करने में सहायक होती है |

चिकित्सा विज्ञान की आश्चर्यजनक प्रगति के बावजूद अल्सर रोगों का दुर्भाग्य यह है कि कोई भी इलाज पुख्ता स्सभित नहीं होता एवं भला चंगा होने के बाद कुछ महीनें या साल दो साल के बाद रोग फिर से उभर आता है |

तरुण डॉक्टर बैरी मार्शल जो १९८२ में ऑस्ट्रेलिया के एक अस्पताल में इन्टरन रेजिडेंट डॉक्टर था को ध्यान इस तथ्य पर गया की अल्सर के रोगियों के बायोप्सी से लिए गए उत्तकों में एक विशेष प्रकार का कीटाणु सदैव ही विद्यमान रहता है | जबकि जिन रोगियों को अल्सर अथवा गस्त्रिति नहीं होती उनमें ये कीटाणु नहीं होते | एक १९४० के शोधपत्र के अनुसार बिस्मथ से अल्सर का उपचार संभव है |

मार्शल के बिस्मिथ का उपयोग उपचार में मुख्य दवा के रूप में किया और पाया की लगभग सभी रोगी ठीक हो गए | किंतु बहुत से रोगियों में कुछ समय बाद फिर से उभर आया | इसलिए बिस्मिथ के साथ उसने एंटीबियोटिक एवं बिस्मथ के संयुक्त प्रयोग से अच्छे हुए रोगी स्वस्थ ही बने रहे एवं दुबारा अल्सर के शिकार नहीं हुए | अमेरिका के टेक्सास मेदिकार सेंटर के गेस्त्रोएन्त्रोलोजि विभाग के अध्यक्ष डेविड ग्राम के निर्देशन में चलाए गए एक अध्ययन से यह प्रमाणित हुआ की एन्तिबिओतिक दवाओं, बिस्मिथ एवं रेनितिदीन के संयुक्त उपचार से गस्त्रिक अल्सर के 95% रोगी सदा के लिए ठीक हो गए | अब अल्सर के रोगियों को पीड़ा भरी जिन्दगी से मुक्ति दिलाने का हथियार, चिकित्सक को मिल गया है |

 

 

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