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काम तथा आराम में सामंजस्य जरूरी 

जीवन यापन करने के लिए काम तो करना ही होता है | किंतु विश्राम में इतना ही जरूरी है. इसी से शरीर को स्फूर्ति तथा शक्ति प्राप्त ही है | थकावट दूर कर, फिर से काम में जुट जाने की हिम्मत आती है | अतः विश्राम अवश्य करें |

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  • काम-काम और केवल काम करने वाले व्यक्ति समय से बहुत पहले वृद्ध हो जाते है | कार्य करने की क्षमता नही रहती | इस प्रकार कुछ समय काफी काम करने वाला व्यक्ति जल्दी निठल्ला, निक्कमा, बेकार तथा बीमार हो जाता है |
  • हमारा शरीर अनेक छोटे बड़े अंगो से बना ही | कुछ अंग ऐसे भी है जो अन्य अंगो को क्रियाशील होने में मदद करते है |
  • हर कार्य में शकति लगती है, कहीं काम तो कहीं ज्यादा यदि इस व्यय की गई शक्ति की क्षतिपूर्ति न हो तो शक्ति का भंडार एक न एक दिन खली होना ही है | यदि विश्राम करने से हम खोई हुई शक्ति को साथ ही साथ पुनः प्राप्त कर लें तो शरीर दीर्घकाल तक कार्य करता रहेगा |
  • हमारे शरीर को चलाए रखने के लिए आहार, आराम, भी चाहिए | यदि वे दोनों समय समय पर उपयुक्त मात्रा में शरीर पता रहे तो यह ठीक कम करेगा |
  • हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग मस्तिस्क है | यदि इसे उचित विश्राम न मिले तो पागल होने की नोबत आ सकती है | ऐसा अवसर न आने दें |
  • जो व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक स्वस्थता चाहता है, उसे विश्राम करना नितांत आवश्यक होता है |
  • यदि हम शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हुए थक जाएँ तो हमें कुछ देर विश्राम कर लेना चाहिए | थोड़ी देर दरया बंद कर, फिर चुस्त हो सकते है |
  • और दखिए ! आधा दिन काम किया | लंच ब्रेक मिला, खाना खाया | थोडा आराम किया | थोडा सुस्ताए | फिर से काम करने योग्य हो जाते है |
  • भोजन कर, आराम नहीं करेंगे तो लाभ नहीं होगा |
  • रत के समय कुछ घंटो की नींद लेने से खोई शक्ति हासिल हो जाती है |

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