Home » Cause and Prevention » The Importance of Fast Celibacy – “ब्रहमचारी व्रत का महत्व”

ब्रहमचारी व्रत का महत्व

  • व्यक्ति के शरीर का संचालन मन द्वारा होता है |
  • काम वासना भी सबसे पहले मन में उठती है | फिर शरीर के अंगों में, लिंग में, मन के आदेश पर शरीर उत्तेजित होता है |
  • मन पर विजय पा लेना मन में काम वासना का विचार न उठे, यही प्रयत्न हमें ब्रहमचारी का पालन कर सकता है | 
  • वीर्य हमारी अमूल्य धातु है | हम जो भोजन करते हैं, उससे जो सात धातुओं का निर्माण होता है, उन सब में अंतिम वीर्य का निर्माण है | यही हमारे उत्तम स्वास्थ्य का आधार है | 
  • वीर्य का पूर्ण रक्षा से संपूर्ण निरोगता पाई जा सकती है |
  • इंद्रियों का मूल अंश वीर्य में है | 
  • संतान प्राप्ति की इच्छा से यदि कोई व्यक्ति स्त्री-गमन करता है, तो भी उसे ब्रहमचारी ही मानते हैं |
  • केवल काम संतुष्टि के लिए, योग के लिए पत्नी के साथ शयन करना ब्रहमचारी नहीं माना जाता यह तो मात्र वासना पूर्ति ही है | 
  • विधार्थी जीवन काल में, विवाह से पूर्व के समय में तथा वानप्रस्थ आश्रम में स्त्री गामा की आज्ञा नहीं | यदि ऐसे समयों पर कोई संभोग करता है तो वह ब्रहमचारी नहीं | 
  • जो व्यक्ति वासनाओं को पूरी तरह त्याग देता है | वासनाओं से ऊपर उठकर प्रभु की राह पर चलता है वह ब्राहाचारी है | उसे ब्रहा प्राप्ति हो सकती है | 
  • जिस व्यक्ति के सात्विक विचार होंगे, वह ब्राहाचार्य का पालन कर सकता है | जिस व्यक्ति का सात्विक आहार होगा उसे भी ब्रहमचारी का पालन करना सरल होगा | 
  • जो व्यक्ति काम, क्रोध, मोह, अहंकार को पास नहीं भटकने देता वह भी ब्रहमचारी का पालन कर सकता है | वह ब्रहा को पा लेता है |
  • साधना, ध्यान से भी ब्रहमचारी का पालन करना सरल हो जाता है | ऐसे में वह काम वासना से इतना ऊपर उठ जाता है | उसे स्त्री में भी भगवान्  का रूप दिखाई देता है न कि भोग की चीज | ब्रहा पाना भी सरल हो जाता है |
  • मन में काम वासना बनी रहे और ऊपर से ब्रहमचारी की चादर ओढने वाला ढोंगी होता है | वह ब्रहमचारी नहीं | ब्रहा को भी नहीं पा सकता है | 
  • जो ब्रहमचारी का पालन करता है, वह सदा स्व्श्य रहता है | वह निरोग रहता है | रोग उसे परेशान नहीं करते | उसकी बुद्धि भी तीव्र रहती है | 

पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ब्राहाचारी होना, उसी के हित की बात है | 

The Importance of Fast Celibacy

  • Steering is by a body mind.
  • Passion arises in the mind first. Then the body parts, sex, on the orders of the mind body is stimulated.
  • Mind to overcome the thought of passion came to mind, it might try to follow us Celibacy.
  • Semen is our invaluable metal. When we eat, the seven metals that are formed, in all of them is the construction of the final semen. That’s our good health is the foundation.
  • Free from sickness can be found in the semen of Defence.
  • Senses is the basic component in semen.
  • If a person has the desire for children and women moves, even though he admits Celibacy.
  • Only job satisfaction, yoga is not considered Celibacy to bed with the wife it is just lust fulfilment.
  • Student life span, before the ceremony, and at the time of the woman in the ashram vanaprastha not obey gamma. Celibacy such times, he did not have any intercourse.
  • The person who desires to leave altogether. He is on the road to the Lord desires to rise above the Celibacy . It may be the realisation Brahma viz.
  • The person will be considered virtuous, he could follow Celibacy. The virtuous person’s diet to follow, he will simplify Celibacy.
  • The person, anger, attachment, ego does not wander too Celibacy could follow. He attains Brahma viz.
  • Silence, meditation is easier to follow than the Celibacy. He has taken up so much of that passion. God appears in the form of a woman, not a thing of enjoyment. It is easier to obtain even Brahma viz.
  • Lust remains in the mind and the Pretender is Odne wrap up Celibacy. He not Celibacy. Not even be able to Brahma viz.
  • Celibacy which follows, it is always healthier lives. He stays healthy. Diseases do not bother him. His wisdom is too intense.

Celibacy to stay healthy person be full, that is a matter of interest.

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