Home » Cause and Prevention » “Treatment of fistula-in-ano hidden disease (गुप्त रोग भगंदर के उपचार )” Cause and Prevention

गुप्त रोग भगंदर के उपचार 

यह रोग छोटी-छोटी फुंसियाँ लाता है जो मलदार या गुदा के आस-पास हो जाया करता है | इनसे जब हलके लाल रंग का पानी निकलता है तो दर्द भी होता है | यह दर्द तथा खुजली करता ही रहता है | शीघ्र उपचार अवश्य करें | 

यह भंगदर रोग हमारे गलत खान-पान का ही परिणाम है । जैसे अधिक गर्म भोजन खाना, जिनमे खूब मिर्च मसाले हों । माँसाहारी व्यक्ति का अधिक मात्रा में माँस, मछली, अंडा आदि खाना इस रोग को पैदा करता है ।

अधिक तले हुए पदार्थ खाने से भी, उसे भी यह रोग हो जाता है | खटाई, चाट-पकौड़े, टिकिया, समोसे तथा ऐसे ही तवे पर तले पदार्थ इसका कारण बनते हैं |

परहेज – भंगदर रोग हो, या हो जाने पर जल्दी ठीक हो, इसके लिए ये परहेज जरुरी हैं –

  1. अधिक भारी, घी-तेल से बने पदार्थ कम खाएँ |
  2. यदि इससे बचना है तो गर्म प्रकृति की चीजों का खाना त्याग दें | स्वाद के लिए भी इस ओर आकर्षित न हों |
  3. आलू, कचालू, अधिक मिर्च, खटाई, पकौड़े, चाट, टिकियाँ, समोसे आदि मत खाएँ |
  4. ऐसे रोगी के भोजन में ताजा फल, कच्ची सब्जियाँ, सलाद आदि बहुत बढ़ा दें | फल, वृक्ष पर पके ही अछे होते हैं |
  5. जो फल अधिक हितकारी रहें और इस रोग के लिए विशेष उपयोगी, उन्हें ही खाएँ | जैसे, चीकू, अंगूर, पपीता, संतरा, बब्बुगोशा, मीठा नींबू, मौसमी, मालटा आदि खाएँ |
  6. गेंहूँ के पौधे को पीसें | इसके रस को पीना ठीक रहता है |

उपचार- भगंदर के रोगी को खुजली व दर्द से बचाने के लिए निम्नलिखित क्रिया कर ठीक रह सकते हैं | पहले उसे एनीमा दें | पेट को साफ कर दें | फिटकरी का पानी बनाएँ | इसे फुंसियाँ पर लगाएँ और फुंसियाँ साफ कर लें | गाय का दूध लें | इस दूध में रीठा, तिल, महुआ पीस कर लगाने से आराम मिलता है |

  • कभी-कभी गर पट्टी का सेंक दें |
  • खूब स्वच्छता बनाए रखें |
  • नीम के ग्यारह नए पत्ते लें | इन्हें काली मिर्च, शहद के साथ खाएँ |
  • नीम के पत्तों की पुलटिन बनाएँ | फुंसियाँ साफ करके उन पर बांधे | आराम आता जाएगा |

मनुष्य प्रयत्न कर , भगंदर रोग से बच जाता है ।  चूँकि  यह रोग कुछ-कुछ गुप्त है, अत: जो व्यक्ति इस रोग को छिपाता है, उसका रोग बिगड़ भी जाता है ।  इससे बचें । 

Treatment of fistula-in-ano hidden disease

The disease, which brings small pimples used to get around the anus or rectum. When the light turns red, they have water causes pain. It remains that pain and itch. Early treatment must.

This archosyrin disease is the result of our unhealthy eating habits. Such as eating hot food, chili spices which are plenty. Non higher amounts of individual meat, fish, poultry, etc. The disease produces food.

More than eating fried foods, it also gets the disease. Sour, licking-fritters, cakes, pan-fried foods like samosas and its cause.

Avoidance – archosyrin disease, or when recovering quickly, are important for avoiding these –

  1. Heavy, material made from oil, eat less.
  2. If it is to avoid hot food abandon things of nature. This may not be attracted to the taste.
  3. Potatoes, salad, more pepper, sour, fritters, licking, tablets, do not eat pie.
  4. Such patient food fresh fruits, raw vegetables, salads etc. Very increase. Fruit, ripe on the tree are possible good.
  5. Be more profitable fruit and particularly useful for this disease, only eat them. As such, sapota, grapes, papaya, oranges, Bbbugosha, sweet lime, seasonal, etc. Eat Malta.
  6. Pisen wheat plant. The juice drink is fine.

Treatment of fistula-in-ano itching and pain to the patient can be cured to prevent the action. Let him first enema. Get rid of the stomach. Create alum water. Locate and Wipe Pimples it on. Take cow’s milk. Reetha in the milk, sesame, grinding Mahua tax relief.

  • Sometimes poor bar give warmth.
  • Maintain plenty hygiene.
  • Eleven new take neem leaves. They pepper, eat with honey.
  • Create Pultin of neem leaves. Pimples cleaned and binds them. Will do the rest.

Man trying, fistula-in-ano is escaping from the disease. Since this disease is somewhat secret, so the person who hides the disease, the disease is even worse. Avoid it.

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