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सारिवा (अनंत मूल)

परिचय

sarivaभारत के अनेक मैदानी क्षेत्रों में यह प्राकृतिक रूप से होता है | इसका रंग-रूप हमें धरती पर बिछे हुए अथवा बड़े वृक्षों पर चढ़े हुए नजर आता है | इसके पत्ते गोल सूक्ष्म चिकने होते हैं जो 2 से 4 इंच तक लंबे होते हैं | इस पर गुच्छी के आकार के फल लगते हैं | इसकी जड़ 1 फुट लंबी 3 से 6 मि. मी. मोटी होती है, जिसके अंदर के भाग का रंग पीला होता है ।

लाभ तथा गुण

सारिवा की ताजा जड़ से एक प्रकार का उड़नशील तेल निकलता है | उस तेल में काउमरिन नामक गंधयुक्त खाद्द् पदार्थ 80% होता है |
इसकी तासीर ठंडी होती है | इसे खाने से वीर्य गाढ़ा होता है जिससे शरीर में एक नई शक्ति, नया जोश पैदा होता है |

Sariva (Anant Mul)

Introduction

sariva1It occurs naturally in many of India’s plains. The look we were lying on the ground or mounted on large trees mirrored. Its leaves are round, smooth subtle are 2 to 4 inches long. Morel takes on the shape of the fruit. Its root 1 foot long, 3 to 6 m. M. Thick, in which part of the color yellow.

Advantages and Properties

Sariva fresh root implies a kind of volatile oil. The oil contains 80% Kaumrin the odorous substance Kadd.
The impression is cool. Eating it is thick semen in the body of a new power, a new passion is born.

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