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Medicinal use of Nisit in Constipation, Worm, Phlem, Spleen, Stomach, Pile and Heart Disease

निसीत निसीत हमें कई रंगों में उपलब्ध होती है । 1. सफ़ेद 2. श्याम 3. लाल 4. काली सफेद निसीत की बेल जंगलों में होती है । इस पर सफेद रंग के फुल आते हैं, उनमें चार-चार बीज होते हैं । इसके पत्ते नुकीले तथा गोल होते हैं । इस बील की लकड़ी में तीन धारे होती हैं । सफेद निसीत को सबसे अच्छा गुणकारी माना जाता है । काली...

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Medicinal use of Juhi plant in Bile Diseases and Heat Stroke

जूही संस्कृत नाम – थूकि जूही एक प्रसिद्ध जड़ी है । बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि जूही का कोई पौधा नहीं होता बल्कि यह एक लता होती है जो बड़े पौधों पर चढ़ कर पलती है । प्रकृति का यह खेल भी कितना विचित्र लगता है कि बिना जड़ के हरे पौधे पल रहे हैं । जूही को इन चार जातियों में बांटा गया है 1....

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Medicinal use of Kasoda Plant in Weakness, Constipation, Body Head, Itching.

क्सौदा इसका पौधा धरती से दो-तीन फुट ऊंचा होता है, इसकी पत्तियां जामुन की पत्तियों जैसी ही, उसी आकार की होती हैं । इसकी कोई फसल नहीं बोई जाती । यह प्राकृतिक रूप से धरती से जन्म लेता है । इस पर पीले रंग के फुल आते हैं और चपटी फलियां फल के रूप में लगती हैं । फलियों के अंदर पपटे रंग के बीज होते हैं । कुछ लोग...

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Medicinal use of Velvet Plant in Cough, Cold, Colic and Diarrhea

पाढ़ पाढ़ कोई वृक्ष या पौधा नहीं बल्कि एक बेल होती है | इसके कोने में से सफेद और सूक्ष्म मोर के समान फुल निकलता है | इसके पत्ते गोल होते हैं तथा फल मक्का के दानों की भांति लाल होते हैं | गुण तथा लाभ पाढ़ उष्ण, चरपरा, कडुवा, पोक्षण तथा हल्का होता है | इसके द्वारा हम खांसी, नजला, जुकाम, शूल, ज्वर, अतिसार जैसे रोगों का उपचार कर...

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Medicinal use of Poke Root in Goiter, Skin diseases and Impetigo

Poke Root: Phytolacca decandra Part used: Root Alterative, resolvent, deobstruent, detergent, antisypilitic,   antiscorbutic Tender leaves in early spring make excellent greens. Tones up the whole system. The root makes a good spring tonic. The root excites the whole glandular system. Best alterative known. The green root is especially good for enlargement of the glands and spleen, especially the thyroid gland. For goiter, take internally and apply externally. Tea is excellent...

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Medicinal use of Pleurisy in Colds, Flu, Bronchial and Pulmonary ailments

Pleurisy: Asclepias Tuberosa Part used: Root Expectorant, carminative, tonic, diuretic, diaphoretic, relaxant, antispasmodic Valuable in pleurisy. Excellent for colds, flu, bronchial and pulmonary ailments. Very useful in scarlet fever, rheumatism, fevers, lung fever, typhus and measles. Clean stomach first with an emetic. Apply a cold compress to area and cover with a flannel for pleurisy. Pleurisy root is a good kidney tonic and is effective in asthma. For peritonitis, combine...

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Medicinal use of Plantain in Sores, Ulcers and Burns

Plantain: Plantago major     Part used: Whole plant Alterative, diuretic, antisyphilitic, antiseptic astringent, deobstrunet, styptic, vulnerary. The American Indians used this herb. Both the narrow and wide leaf are good. Has soothing, cooling, healing effect on sores, ulcers and burns. Fresh leaves (crushed) will check bleeding. Useful for erysipelas, eczema burns and scalds. Make a strong tea and apply often. Inject the tea for hemorrhoids after each stool. For...

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Medicinal use of Harfarevdi “हारफारेवडी” in Stomach Disease and Digestive Disease

हारफारेवडी हारफारेवड़ी का पौधा देखने में बड़ा सुंदर होता है । इसका जन्म प्रकृतिक रूप से मैदानी क्षेत्रों तथा पहाड़ी के आसपास के खुले क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से होता है । इसके पत्ते तीखे, लंबे कम चौड़े होते हैं, जिनका आकार कसौदी के पत्तों जैसा होता है । गुण तथा लाभ हारफारेवड़ी का फल तथा पत्ते सब के सब ही गुणकारी हैं । विशेष रूप से दिल के रोगियों...

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Medicinal use of Sahdai “सहदेई” in Fever, Eye Disease and Headache

सहदेई सहदेई एक बूटी है जो प्राकृतिक रूप से जन्म लेती है । इसके पत्ते पुदीने और तुलसी जैसे होते हैं । इस पर सफेद फुल आते है । यह अधिकार पहाड़ी तलहटियों में पाई जाती है । गुण तथा लाभ सहदेई की लुगदी में पारा पाया जाता है । पुराने बुखार के लिए सहदेई के पत्ते काली मिर्च के साथ पीसकर खाएं तो बुखार से मुक्ति मिलेगी । सिरदर्द...

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Medicinal use of Sarfinka in Fever and Bad Breath

सरफींका यह बूटी प्राकृतिक रूप से ही पहाड़ी क्षेत्रों में जन्म लेती है । इस पर लाल रंग के छोटे-छोटे फुल आते हैं, जो बाद में फलियों का रूप धारण कर लेते हैं । उनमें से सफेद रंग के फल निकलते हैं । लाभ सरफोंक की जड़ को हुक्के की चिलम में भर कर पीनसे से सांस का रोग नष्ट हो जाता है, इसके पौधे की पहचान के लिए चित्र देखें...

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Medicinal use of Rasna in Fever, Stomach Disease and Cough

रास्ना रास्ना एक बेल की भांति बंगाल में प्राचीन वृक्षों पर उत्पन्न होकर फलती-फूलती है, (देखें चित्र, रास्ना की बेल एक पुराने वृक्ष से लिपटी हुई है) | रास्ना के फुल पीले रंग के होते हैं | फलियों के अंदर मोठ की भांति छोटे-छोटे दाने होते हैं | इसकी तासीर गर्म होती है | इसके सेवन से पाचन शक्ति बढ़ती है | खांसी के रोग को दूर करता है |...

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Medicinal use of Betel in Cough and Digestion

सुपारी सुपारी का वृक्ष बहुत लंबा होता है, इसका आकार नारियल के वृक्ष जैसा होता है, यह अधिकतर सागर तट पर पैदा होते हैं। सुपारी के बड़े-बड़े बाग झुंडों के रूप में नजर आते हैं। यह प्राकृतिक रूप से जनम लेने वाला वृक्ष है । जैसा आप वृक्ष के साथ लटक रहे बड़े-बड़े गुच्छों को देख रहे हैं, इन गुच्छों को यदि फोड़ा जाए तो इनके अंदर से सुपारी निकलती...

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