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पुरानी अमीबा का रोग 

Chronic amoeba disease

 

परिचय:-

यह एक प्रकार का ऐसा रोग है जो बहुत अधिक व्यक्तियों को होता है। यह रोग अधिकतर गंदी आदतों तथा गंदगी के कारण होता है। जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसे जल्दी ही इसका उपचार करना चाहिए नहीं तो यह रोग बढ़कर अमीबा रुग्णता तथा फेफड़ों में जख्म बना सकता है।

पुरानी अमीबा का रोग होने का कारण :-

           यह रोग अमीबा रुग्नता कोशिका में पाए जाने वाले एक ही सूक्ष्मजीव एंटमीबा हिस्टोलटिका के कारण होता है। ये सूक्ष्मजीव एंटमीबा दूषित पानी में होता है। जब मनुष्य इस पानी का प्रयोग पीने या भोजन करने के काम में लेता है तो ये कीटाणु उनके शरीर में चले जाते हैं और रोग उत्पन्न कर देते हैं। जब ये सूक्ष्म जीव शरीर में चले जाते हैं तो यह बड़ी आंत में पहुंचकर उसमें जख्म बना देते हैं जिसके कारण व्यक्ति को यह रोग हो जाता है।

पुरानी अमीबा का रोग होने के लक्षण :-

जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसे बदहजमी, जी मिचलाना, छाती में जलन, वायु-प्रकोप जैसी समस्याएं हो जाती हैं।

इस रोग से पीड़ित रोगी को पतले दस्त भी होने लगते हैं जिसके कारण उसे बहुत अधिक परेशानी होने लगती है।

रोगी व्यक्ति का शरीर दिन-प्रतिदिन कमजोर होने लगता है तथा उसका वजन भी कम होने लगता है।

जब इस रोग का प्रकोप बहुत ज्यादा हो जाता है तो रोगी व्यक्ति के मल से खून तथा बलगम आने लगता है तथा उसे बुखार हो जाता है और उल्टियां होने लगती हैं।

पुरानी अमीबा रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

इस रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले 2-3 दिनों तक पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए तथा उपवास रखना चाहिए।

उपवास रखने के साथ-साथ रोगी व्यक्ति को पानी में नीम की पत्तियां डालकर, उबालकर, इस पानी को गुनगुना करके एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके।

इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन ठंडे पानी से कटिस्नान करना चाहिए।

पुरानी अमीबा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कुछ दिनों तक दिन में कम से कम 2 बार अपने पेट पर कम से कम 20 से 25 मिनट तक मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए तथा सप्ताह में कम से कम 1-2 बार गुर्दा लपेट क्रिया करनी चाहिए।

इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन अपने पेट पर गीले कपड़े की पट्टी लपेटनी चाहिए।

यदि रोगी व्यक्ति को अफारा या दर्द अधिक हो रहा हो तो इससे छुटकारा पाने के लिए गैस्ट्रो-हेपैटिक लपेट का प्रयोग करना चाहिए।

इस रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कभी-कभी गर्म या ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।

जानकारी

           इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से पुरानी अमीबा रोग उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

 

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