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खांसी 

Cough-Symptoms, Reasons, Causes

 

परिचय:-

जब किसी व्यक्ति के गले, श्वासनली तथा फेफड़ों में कफ तथा कई प्रकार के दूषित द्रव्य जमा हो जाते हैं तो इस दूषित द्रव्य को बाहर निकलने की क्रिया को खांसी कहते हैं।

            जब खांसी लम्बे समय तक चलती है तो इससे स्वर तंतु भिंच जाते हैं, श्वासनली दब जाती है, छाती सिकुड़ जाती है और वायु मार्ग में दबाव बढ़ने लगता है। इन तंतुओं के खुलने पर अचानक दबाव और तेज हो जाता है जिसके कारण दूषित मल बाहर निकलने लगता है। खांसी रोग से पीड़ित रोगी खां-खां करके खांसने लगता है जिसके कारण रोगी को अपनी छाती में भी दर्द होने लगता है। रात को सोते समय, सुबह या आराम करते समय खांसी का वेग तेज हो जाता है। रोगी को खांसी के साथ सुबह के समय उठने पर गाढ़ा पीला बलगम भी निकलता है। गले में जलन या खुजली के साथ खांसी उठ सकती है।

खांसी कई प्रकार की होती है

          जिस खांसी के साथ कफ निकलता है उसे तर खांसी कहते हैं तथा जिस खांसी में कफ नहीं निकलता है उसे सूखी-खांसी कहते हैं या कुक्कर खांसी भी कहते हैं। यदि खांसी लगातार होती रहती है तो खांसते समय रोगी को सीने में दर्द मालूम होता है तथा यह रोग एक सप्ताह से अधिक टिके तो समझना चाहिए कि रोगी को कास रोग शुरू हो रहा है।

          खांसी का ही दूसरा रूप कुकुर खांसी है जो अधिकतर बच्चों को होती है। कुकुर खांसी रोग के कारण रोगी व्यक्ति खांसता तो है लेकिन खांसी के साथ दूषित द्रव्य बाहर नहीं निकलता है। इस रोग में रोगी के मुंह और नाक से लार टपकती है। यह खांसी कई दिनों तक रहती है तथा बहुत अधिक परेशान करती है।

खांसी के और भी 2 रूप होते है जो इस प्रकार हैं

नई खांसी

पुरानी खांसी

          जब नई खांसी किसी चिकित्सा के द्वारा ठीक नहीं होती है तो उसके दुष्परिणाम स्वरूप श्वास नलिकाओं की अन्दर की झिल्ली सूज उठती है जिसके परिणामस्वरूप पुरानी खांसी हो जाती है और यह जल्दी ठीक नहीं होता है।

खांसी होने का कारण

खांसी होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे सर्दी-जुकाम और फ्लू या अस्थमा, काली खांसी और ब्रोंकाइटिस रोग आदि।

खांसी रोग गलत तरीके के खान-पान के कारण, दूषित भोजन तथा भोजन में फलों और सब्जियों की कमी होने के कारण हो सकता है।

खांसी रोग अधिक औषधियों के सेवन करने के कारण भी हो सकता है।

शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण भी खांसी हो सकती है।

पाचनक्रिया में गड़बड़ी हो जाने के कारण भी खांसी रोग हो सकता है क्योंकि इस कारण से भोजन सही तरीके से पचता नहीं है और शरीर में दूषित द्रव्य जमा होने लगता है।

मीठी चीजों को खाने के कारण भी खांसी हो सकती है।

धूल-धुंआ तथा अशुद्ध वायु में रहने के कारण भी खांसी हो सकती है।

अधिक धूम्रपान तथा शराब का सेवन करने के कारण भी खांसी हो सकती है।

खांसी रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

खांसी रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 1 दिन उपवास जरूर करना चाहिए तथा उपवास रखने के बाद 2-3 दिन तक बिना पका हुआ भोजन खाना चाहिए।

खांसी रोग से पीड़ित रोगी को लौकी और पेठे का रस पीना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी का रोग ठीक हो जाता है।

तुलसी तथा अदरक के रस में शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटने से रोगी की खांसी ठीक हो जाती है।

अनार का छिलका मुंह में रखकर चूसने से खांसी रोग ठीक हो जाता है।

1 चम्मच नींबू के रस में 4 चम्मच शहद का रस मिलाकर चाटने से उसका खांसी रोग ठीक हो जाता है।

हल्दी के टुकड़े को मुंह में रखकर चूसने से खांसी ठीक हो जाती है।

आंवले के रस को दिन में 4 बार 1-1 चम्मच की मात्रा में चाटने से खांसी रोग ठीक हो जाता है।

खांसी के रोग को ठीक करने के लिए 1 चौथाई चम्मच शहद को सोंठ तथा इलायची के चूर्ण में मिलाकर दिन में 4 बार चाटने से यह रोग ठीक हो जाता है।

सूखी खांसी को ठीक करने के लिए हरड़ के छिलके को मुंह में रखकर चूसना चाहिए।

खांसी रोग से पीड़ित रोगी को चिकनाई वाली चीजों को प्रयोग नहीं करना चाहिए। रोगी व्यक्ति को हरी सब्जियों का सूप पीना बहुत फायदेमंद साबित होता है।

कालीमिर्च को पीसकर शहद के साथ चाटने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है।

कुकुर खांसी में लहसुन के रस को शहद के साथ मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

सूर्यतप्त बैगनी बोतल का जल पीने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है।

गुनगुने पानी में सन्तरे का रस मिलाकर सेवन करने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है।

कुकुर खांसी को ठीक करने के लिए मुंह में 2-3 लौंग रखकर चबाने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

खांसी रोग से पीड़ित रोगी को तुलसी का काढ़ा बनाकर पिलाने से बहुत आराम मिलता है।

खांसी रोग से पीड़ित व्यक्ति को सुबह तथा शाम के समय में हल्के गुनगुने पानी से गरारे करने से लाभ होता है।

रोगी व्यक्ति को अपने गले तथा छाती के ऊपरी भाग पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी रोग ठीक हो जाता है।

खांसी के रोग को ठीक करने के लिए रोगी से एनिमा क्रिया करानी चाहिए तथा इसके साथ-साथ जलनेति क्रिया भी करानी चाहिए और रोगी व्यक्ति को दाहिने स्वर से सांस लेनी चाहिए।

पुरानी खांसी को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को 3 दिनों तक फलों का रस पीना चाहिए और उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद 10 दिनों तक फलों का सेवन करना चाहिए और जब तक कब्ज की समस्या दूर न हो तब तक एनिमा क्रिया लेकर पेट को साफ करना चाहिए।

पुरानी खांसी को ठीक करने के लिए सुबह के समय में रोगी व्यक्ति की छाती तथा कन्धों पर लगभग डेढ़ घंटे तक कपड़े की भीगी पट्टी बांधनी चाहिए। फिर इसके बाद कम से कम 10 मिनट के लिए रोगी को उदरस्नान कराना चाहिए। रात के समय में जब रोगी व्यक्ति सो रहा हो तो उसकी छाती पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए और एक घंटे के बाद दुबारा से उसकी छाती तथा कंधे पर भीगी पट्टी बांधनी चाहिए। रोगी व्यक्ति को नींबू का रस मिला हुआ पानी अधिक मात्रा में पीने के लिए देना चाहिए और रोगी को गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करने चाहिए।

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