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फ्लू (इन्फ्लूएंजा) 

Influenza- Symptoms, Reasons, Causes

 

परिचय:-

फ्लू एक प्रकार के बुखार को कहते हैं। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है। यह रोग श्वास-प्रणाली के ऊपरी भाग को बहुत अधिक प्रभावित करता है। इस रोग में रोगी को बुखार ठंड लग कर आता है। इस रोग में रोगी को बुखार के साथ सिर तथा शरीर की मांसपेशियों में दर्द होता रहता है। इस रोग के कारण रोगी की नाक तथा गले में सूजन भी हो जाती है। फ्लू में रोगी की नाक तथा आंख से पानी भी आने लगता है। ऐसा लगता है कि रोगी व्यक्ति रो रहा हो। इस रोग में रोगी को बुखार कम से कम 102 डिग्री तक और 2-3 दिन तक रहता है लेकिन इस रोग में जब बुखार 104 डिग्री तक रहता है तो बुखार कम से कम 5 दिनों तक बना रहता है।

फ्लू बुखार को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

इस रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को आराम करना चाहिए तथा जब तक बुखार के लक्षण दूर न हो जाए तब तक नींबू का रस पीना चाहिए।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को कुछ दिनों तक उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद फल खाने चाहिए और फिर सामान्य भोजन खाना चाहिए।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन गुनगुने पानी का एनिमा देना चाहिए। फिर उसके पेट पर मिट्टी का लेप करना चाहिए।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को गर्म कटिस्नान कराना चाहिए तथा उससे जलनेति क्रिया करानी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

अगर फ्लू बुखार के कारण रोगी का शरीर बहुत तेज गर्म हो तो उसके पेट तथा माथे पर ठंडी गीली पट्टी करनी चाहिए।

फ्लू रोग के कारण बुखार तेज हो तो रोगी को स्पंजस्नान कराना चाहिए और फिर गीली चादर लपेटनी चाहिए और उसके कुछ देर बाद गर्म पादस्नान करना चाहिए।

फ्लू रोग के कारण यदि बहुत तेज बुखार हो तो रोगी को कुंजलस्नान करना चाहिए जिसके फलस्वरूप बुखार कम हो जाता है।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी के शरीर पर घर्षण क्रिया करने से बुखार बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से विश्राम करना चाहिए तथा इसके बाद रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त नीली बोतल का पानी 2-2 घंटे बाद पीना चाहिए जिसके फलस्वरूप बुखार जल्दी ठीक हो जाता है।

जब रोगी व्यक्ति का बुखार उतर जाता है और उसके जीभ की सफेदी कम हो जाती है तो फलों का ताजा रस पीकर उपवास तोड़ देना चाहिए। इसके बाद रोगी को कच्चे सलाद, अंकुरित दालों व सूप का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से रोगी को दुबारा फ्लू बुखार नहीं होता है।

रोगी के रीढ़ की हड्डी पर बर्फ की मालिश करने से बुखार कम हो जाता है।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को यदि तुलसी की पत्तियां उबालकर उसमें कालीमिर्च पाउडर और थोड़ी चीनी मिलाकर पिलायें तो यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को दूध नहीं पीना चाहिए और यदि दूध पीना भी हो तो दूध में पानी मिलाकर हल्का कर लें। इसके बाद इसमें शहद मिला लें लेकिन ध्यान रहे इसमें चीनी नहीं डालनी चाहिए।

फ्लू बुखार से पीड़ित रोगी को शीतकारी प्राणायाम, शीतली, शवासन तथा योगध्यान करने से बहुत अधिक लाभ होता है और उसका फ्लू बुखार जल्द ही कम हो जाता है।

जानकारी

          इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा उपचार करने से फ्लू बुखार बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।

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