Home » Herbal Treatment » Herbal Home remedies for Brain Diseases,” Mann aur Mastishk ke Rog”,” Headache”,”Sir dard ka Ilaj”,Symptoms, Reasons, Causes-“Herbal Treatment”

सिर में दर्द (Headache) 

Headache-Symptoms, Reasons, Causes

 

परिचय:-

सिर दर्द में रोगी को बहुत अधिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। वैसे देखा जाए तो सिर में दर्द अपने आप में कोई रोग नहीं होता है, लेकिन सिर में दर्द किसी और रोग के होने का लक्षण हो सकता है। सिर में दर्द इस बात की सूचना देता है कि व्यक्ति के शरीर में कहीं कोई खराबी तो नहीं है। शरीर में यह खराबी शरीर के किसी अंगों में खराबी हो जाने के कारण हो सकता है तथा मानसिक परेशानी के कारण भी हो सकता है।

        शरीर के किसी अंग की क्रिया में गड़बड़ी होने पर और भी कई प्रकार के रोग व्यक्ति को हो सकते हैं जैसे- सूजन, जलन, दर्द, जुकाम आदि।

सिर में दर्द होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

सिर में दर्द होने का सबसे प्रमुख कारण पाचनक्रिया का खराब होना और मल का सही तरह से शरीर के बाहर न निकलना हो सकता है।

शरीर में जहरीले पदार्थ उत्पन्न हो जाने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

अधिक मानसिक या शारीरिक कार्य करने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

अधिक दर्द निवारक औषधियों का सेवन करने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

कब्ज बनने के कारण सिर में दर्द हो जाता है।

भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

पेट में अन्य प्रकार की खराबियों के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

अधिक उत्तेजक वस्तुएं जैसे- चाय, कॉफी, तम्बाकू आदि के सेवन से सिर में दर्द शुरू हो जाता है।

आंतों में किसी तरह की खराबी हो जाने के कारण भी सिर में दर्द होने लगता है।

कई प्रकार के रोगों के हो जाने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है जैसे- भूख न लगना, जुकाम, हृदय के रोग, नाड़ी में कमजोरी आ जाने, कानों के रोग, शरीर में ऊर्जा की कमी, शरीर में खून की कमी हो जाना, मस्तिष्क सम्बन्धित रोग, यकृत की शिथिलता तथा नींद न आना आदि।

अत्यधिक परेशानी, शोक तथा भय के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

सिर पर ज्यादा कसके पट्टी बांधने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

स्त्रियों को मासिकधर्म के शुरू होने पर अधिक स्राव होने के कारण भी सिर में दर्द होता है।

मासिकधर्म बंद हो जाने के कारण भी सिर में दर्द होने लगता है।

किसी वस्तु को ज्यादा गौर से देखने के कारण भी सिर में दर्द होने लगता है।

कम रोशनी में पढ़ने के कारण भी सिर में दर्द होने लगता है।

आंखों के रोग हो जाने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

हाई ब्लडप्रेशर या लो ब्लडप्रेशर के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है।

अधिक छींकने, खांसने या शरीर को एकाएक मोड़ देने से भी सिर में दर्द हो सकता है।

मस्तिष्क में खून की अधिकता हो जाने के कारण भी सिर में दर्द होने लगता है क्योंकि इस कारण से खून की गति में विभिन्नता हो जाती है तथा तनाव उत्पन्न हो जाता है और सिर के अंदर की खून की नलिकाएं फूल जाती हैं।

सर्दी तथा जुकाम हो जाने के कारण सिर के ललाट (माथा) और कनपटियों में दर्द होने लगता है जो सिर में तेज दर्द होने का कारण बनता है।

गर्दन के पिछले भाग में दर्द हो रहा हो तो नाड़ी कमजोर हो जाती है और नाक, आंख तथा मस्तिष्क में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं जिसके कारण भी सिर में भी दर्द होने लगता है।

जिगर में किसी तरह का रोग उत्पन्न हो जाने के कारण पित्त का स्राव कम हो जाता है और आंतों के कार्य करने की गति में कमी आ जाती है जिसके कारण सिर में दर्द होने लगता है।

सिर के दर्द को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-

यदि उच्च रक्तचाप तथा निम्न रक्तचाप के कारण सिर में दर्द हो रहा हो तो सबसे पहले ब्लडप्रेशर (खून का दाब) को सामान्य करना चाहिए और इसके बाद सिर दर्द का इलाज करना चाहिए।

सिर दर्द का उपचार करने के लिए कभी भी दवाइयों का उपयोग नहीं करना चाहिए बल्कि इसका इलाज करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए।

सिर दर्द का इलाज करने के लिए सबसे पहले इसके कारणों को दूर करना चाहिए और इसके बाद चिकित्सा शुरू करनी चाहिए।

सिर दर्द का इलाज करते समय नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को कम से कम एक सप्ताह तक मौसमी, आम, संतरा, सेब, अंगूर तथा टमाटर आदि का जूस तथा फल का सेवन करना चाहिए

सिर दर्द से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन एनिमा लेने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

सिर दर्द से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन चोकर मिले हुए आटे की रोटी खानी चाहिए और दूध का सेवन करना चाहिए।

सिर दर्द से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन समय पर सो जाना चाहिए तथा सोते समय तकिए को अपने सिर के नीचे नहीं लगाना चाहिए।

यदि रोगी व्यक्ति के खून में जहरीले तत्व बहुत अधिक बढ़ गए हो तो सबसे पहले रोगी के खून को साफ करने के लिए उपचार करना चाहिए और फिर सिर दर्द का उपचार करना चाहिए।

यदि व्यक्ति को सिर में दर्द के साथ बुखार भी हो तो पहले बुखार दूर करने का उपाय करना चाहिए और फिर सिर दर्द करने की चिकित्सा करनी चाहिए।

रोगी व्यक्ति को हर समय अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और हमेशा स्वादिष्ट तथा पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

 सिर दर्द से पीड़ित रोगी को स्वच्छ और साफ हवादार जगह पर रहना चाहिए।

सिर दर्द से पीड़ित रोगी को कुछ दिनों तक सुबह-शाम को गीली मिट्टी की पट्टी अपने पेड़ू पर आधे-आधे घण्टे तक रखनी चाहिए और फिर इसके बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक उदरस्नान करना चाहिए।

सिर दर्द से पीड़ित रोगी को अम्लता दूर करना चाहिए।

मस्तिष्क में खून की अधिकता हो जाने के कारण होने वाले सिर दर्द को ठीक करने के लिए अपने पैरों पर लगभग सात मिनट तक गरमपाद स्नान करना चाहिए इसके बाद पैरों को खींचना चाहिए।

सिर में गीली पट्टी करने से भी सिर में दर्द ठीक हो जाता है।

यदि रोगी के सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो रोगी को उदरस्नान कराना चाहिए।

मस्तिष्क में खून की कमी हो जाने के कारण सिर में दर्द हो रहा हो तो रोगी की गर्दन के पीछे गरम जल की थैली लगाकर या फिर गीली गरम सेंक करने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

सिर दर्द को ठीक करने के लिए पाचन सम्बन्धित रोगों को ठीक करना चाहिए। इसके बाद सिर दर्द का उपचार करना चाहिए।

कुछ दिनों तक फलों का रस पीकर उपवास रखने तथा इसके बाद एनिमा लेने और सादा भोजन करने से भी सिर दर्द ठीक हो जाता है।

यदि जिगर में दोष उत्पन्न होने के कारण सिर में दर्द हो रहा हो तो सबसे पहले जिगर के रोगों को दूर करना चाहिए।

सिर दर्द को ठीक करने के लिए सबसे पहले सिर दर्द होने के मूल कारणों को दूर करना चाहिए। इसके बाद आंखों का हल्का व्यायाम करने से सिर का दर्द जल्द ही ठीक हो जाता है।

अधिक कार्य करने के कारण यदि सिर में दर्द हो रहा हो तो रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए। इससे सिर का दर्द जल्द ही ठीक हो जाता है।

यदि सर्दी और जुकाम के कारण सिर में दर्द हो रहा हो तो सबसे पहले सर्दी और जुकाम का इलाज करना चाहिए और इसके बाद सिर दर्द का उपचार करना चाहिए।

सिर दर्द को ठीक करने के लिए नाक की सफाई करनी चाहिए जिससे सिर में धीरे-धीरे होने वाला दर्द तुरंत ही ठीक हो जाता है।

किसी भी प्रकार का सिर दर्द क्यों न हो उसको ठीक करने के लिए रोगी को सबसे पहले फलों का रस पीकर कुछ दिन उपवास रखना चाहिए। इसके बाद रोगी को एनिमा लेकर पेट को साफ करना चाहिए। इसके अलावा सिर पर गीली पट्टी का या फिर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए। इसके बाद रोगी को अपने सिर पर तेल से मालिश करनी चाहिए। इससे सिर का दर्द तुरंत ही ठीक हो जाता है।

About

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Name
Email
Website