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सर्दी (जुकाम) (Cold) 

Cold- Symptoms, Reasons, Causes

 

परिचय:-

जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके नाक से पानी बहने लगता है। इस रोग के कारण रोगी व्यक्तियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि इस रोग का समय रहते उपचार न किया जाए तो यह कई रोगों को जन्म दे सकता है जैसे-पीनस, ब्रोंकाइटिस, इन्फ्लूएंजा, निमोनिया तथा यक्ष्मा (टी.बी.) आदि।

सर्दी होने पर लक्षण:-

यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसकी नाक से पानी बहने लगता है तथा उसके सिर में भारीपन महसूस होने लगता है। रोगी व्यक्ति को हलका बुखार तथा शरीर में दर्द व थकान भी होती है।

जब इस रोग की शुरूआत होती है तो रोगी व्यक्ति को ठंड लगने लगती है तथा उसके गले में खराश होती है और नाक बहने लगती है।

इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को गले में या सीने में खांसी उठती है, तथा कभी-कभी तो यह बारी-बारी से उठती है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को सांस लेने में परेशानी भी होने लगती है तथा रोगी व्यक्ति की आवाज भारी हो जाती है और अधिक बोलने-खाने पीने में परेशानी होने लगती है।

सर्दी होने का कारण:-

यह रोग अधिकतर गलत-खान पान के कारण से होता है क्योंकि गलत तरीके से खाने पीने से शरीर में दूषित द्रव जमा हो जाता है जिसके कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।

यह रोग अत्यधिक ठंड लगने, ताजी हवा में सांस लेने से तथा अच्छी आदतों के कारण से हो जाता है।

अधिक ठंडे पदार्थ का भोजन में अधिक उपयोग करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण भी सर्दी रोग हो सकता है।

शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण भी सर्दी हो जाता है।

जब किसी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा छींकने पर उसकी बून्दे किसी स्वस्थ व्यक्ति पर पड़ती है तो यह रोग स्वस्थ व्यक्ति को भी हो जाता है। क्योंकि यह रोग खांसने तथा छींकने से अधिक फैलता है।

सर्दीजुकाम का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

इस रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले हल्की धूप में टहलकर शरीर से पसीना बाहर निकालना चाहिए। फिर इसके बाद रोगी व्यक्ति को स्पंजस्नान कराना चाहिए और फिर से शरीर को गर्म करना चाहिए। इससे इस रोग में लाभ होता है।

जो रोगी व्यक्ति अधिक कमजोर है उसे टहलना नहीं चाहिए बल्कि उसे बिस्तर पर लेटकर आराम करना चाहिए और आधे-आधे घण्टे के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी में नींबू का रस डालकर या फिर गर्म पानी पीना चाहिए। ऐसा करने से नाक खुलकर बहने लगती है और सर्दी का जोर काफी कम हो जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को एक-दो दिन तक उपवास करना चाहिए और उपवास के दौरान केवल नींबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिए या फिर संतरे का रस पीना चाहिए और शाम के समय में गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए। इसके बाद सात दिनों तक रोगी को सिर्फ रसदार ताजे फलों का सेवन करना चाहिए और अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।

इस रोग को दवाइयों के द्वारा दबाना नहीं चाहिए क्योंकि दबाने से और कई प्रकार के रोग उभर सकते हैं।

इस रोग को ठीक करने के लिए नाक में गर्म भाप लेनी चाहिए और नमक मिले गुनगुने पानी में नाक को डुबोकर पानी सूंघना चाहिए जिसके परिणाम स्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक नंगे शरीर पर हल्की धूप लेनी चाहिए तथा एप्सम साल्टबाथ सप्ताह में दो बार लगभग एक महीने तक लेना चाहिए और नारंगी बोतल का सूर्यतप्त जल तथा हरे रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल एक भाग मिलाकर, इस जल के 25 ग्राम की मात्रा को प्रतिदिन दिन में 6 बार सेवन करने से पुराना से पुराना जुकाम का रोग भी ठीक हो जाता है।

हरी बोतल के सूर्यतप्त जल में रुई की बत्ती बनाकर नाक में रखने से यह रोग ठीक हो जाता है।

नाक पर हरें रंग का प्रकाश लगभग 10 मिनट तक प्रतिदिन डालने से पुराना से पुराना जुकाम भी ठीक हो जाता है।

कभी-कभी सर्दी-जुकाम होने के कारण गले में खराश हो जाती है इस रोग को ठीक करने के लिए गुनगुने पानी में थोड़ा-सा कागजी नींबू का रस और जरा-सा नमक मिलाकर दिन में दो से तीन बार गरारा करने तथा गर्दन पर गर्म सिकाई करके इस पर भीगे कपड़े की पट्टी 1 से 2 घण्टे तक आवश्यकतानुसार बांधने से यह रोग ठीक हो जाता है।

यदि सर्दी-जुकाम के कारण नाक बंद हो गई है, सांस लेने में परेशानी होने लगती है या फिर नाक के अंदर जलन होने लगती है तो इस रोग को ठीक करने के लिए सिर पर ठंडा भीगा हुआ कपड़ा रखना चाहिए और चेहरे पर लगभग 20 मिनट तक भाप स्नान करना चाहिए और सांस लेने के साथ-साथ भाप को अंदर की ओर खीचना चाहिए। इसके बाद कंधे और छाती पर भीगे कपड़े की पट्टी बांधनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने पर यह रोग ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति के पैरों में गर्मस्नान तथा मेहनस्नान करने से नाक में जलन तथा नाक बंद होना ठीक हो जाता है।

सर्दी-जुकाम से पीड़ित रोगी को कभी-कभी सीने में कफ जमा होने के कारण सीने में दर्द होने लगता है। इस रोग को ठीक करने के लिए गर्म पानी में भीगे हुए तौलिये से दो दिनों तक रोगी के सीने पर सिकाई करनी चाहिए तथा इसके बाद रोगी के सीने पर गीली पट्टी लगानी चाहिए या फिर रात के समय में कड़वे तेल में थोड़ा कपूर डालकर और गर्म करके उसे सीने पर मलकर ऊपर से एक मोटा कपड़ा बांधना चाहिए जिसके परिणाम स्वरूप सीने में दर्द जो कि सर्दी-जुकाम के कारण हुआ होता है वह ठीक हो जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को दिन में कम से कम चार बार भाप अपने चेहरे पर लेनी चाहिए जिससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलेगा।

रोगी व्यक्ति को दिन में दो बार तथा रात में गर्म कपड़े से अपने शरीर की सिकाई करनी चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी को अपने चेहरे और सीने पर गर्म सिकाई करनी चाहिए तथा इसके साथ-साथ गर्दन पर भी सिकाई करनी चाहिए। रोगी व्यक्ति को अपने पैरों को गर्म पानी में कुछ समय के लिए रखना चाहिए जब तक की पसीना न आने लगे। इस प्रकार से उपचार करने से सर्दी का रोग ठीक हो जाता है।

दिन में समय में रोगी व्यक्ति को अपने गले की गर्म पानी से सिकाई करनी चाहिए तथा रात में गले की खांसी ठीक करने लिए गर्म पानी में भीगे कपड़े की पट्टी रखनी चाहिए। इसके बाद गर्म पट्टी पर सूखे हुए कपड़े की पट्टी रखनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से सर्दी का रोग ठीक हो जाता है।

सर्दी के रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन तथा यौगिक क्रिया है जिनकों सुबह के समय में प्रतिदिन कुछ दिनों तक करने से यह रोग ठीक हो जाता है। ये आसन तथा यौगिक क्रिया इस प्रकार हैं- धनुरासन, योगमुद्रा, मंत्स्यासन, पवनमुक्तासन, सिंहमुद्रा, पर्वतासन, भुजंगासन तथा सुप्तवज्रासन आदि।

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